कोरोना के साइड इफेक्ट : उभर सकती है नई तरह की डायबिटीज

विशेष

कोविड-19 महामारी से एक नए प्रकार का मधुमेह (डायबिटीज) रोग विकसित हो सकता है। यह चेतावनी 17 मधुमेह विशेषज्ञों के एक अंतरराष्ट्रीय समूह ने अपने अध्ययन के जरिये दी है। न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित अध्ययन में बताया गया है कि कोविड के कारण स्वस्थ लोगों को भी विशेष प्रकार का मधुमेह हो सकता है जिसके टाइप-2 मधुमेह से ज्यादा खतरनाक होने की आशंका है।

फिलहाल इस नए मधुमेह को शोधकर्ताओं ने ‘न्यू ऑनसेट मधुमेह’ नाम दिया है। गौरतलब है कि टाइप-2 मधुमेह को ‘ऑनसेट एडस्ट मधुमेह’ भी कहते हैं जो शरीर में इंसुलिन की कमी से होता है। कोविड मरीजों में मधुमेह की प्रकृति और असर को जानने और उसके उपचार के लिए नए चिकित्सीय तरीके इजाद करने के उद्देश्य से 17 विशेषज्ञों का समूह ‘कोविडायब रजिस्ट्री प्रोजेक्ट’ पर काम कर रहा है। इस समूह ने शोध में पाया कि संक्रमित मरीजों में नई तरह की मधुमेह के लक्षण हैं।

उन्होंने न्यू ऑनसेट मधुमेह और पहले से मधुमेह से पीड़ित रहे मरीजों में असामान्य मेटाबोलिक संबंधी जटिलताओं को देखा। वहीं, दूसरी ओर पाया गया कि मधुमेह से पीड़ित मरीज को कोविड होने पर खतरा बढ़ा जाता है। मरने वाले संक्रमित मरीजों में 20 से 30 प्रतिशत मधुमेह के मरीज होते हैं।

कोविड-मधुमेह के बीच संघर्ष

किंग्स कॉलेज लंदन के प्रोफेसर फ्रांसेस्को रुबिनो का कहना है कि मधुमेह एक व्यापक और गंभीर रोग है। हमें यह लगता है कि कोविड और मधुमेह जैसी दो बीमारियों के बीच अपरिहार्य संघर्ष हो रहा है, जिसके परिणाम स्वरूप नए प्रकार की मधुमेह बीमारी देखने को मिल रही है। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि मानव संपर्क में आकर कोरोना वायरस किस तरह ग्लूकोज मेटाबोलिज्म को प्रभावित करता है इसलिए हम नहीं जानते कि यह बीमारी टाइप-1 मधुमेह है या टाइप 2 या फिर मधुमेह का नया प्रकार है।

प्रभाव का पता नहीं

एक अन्य शोधकर्ता पॉल जिमेट का कहना है कि हम अभी यह नहीं जानते कि कोविड से पनपे इस नए तरह के मधुमेह रोग का प्रभाव या भयावहता क्या है, यह मरीज में कोविड के खतरे को बढ़ाता है या नहीं। पर इस ग्लोबल रजिस्ट्री के परिणाम के जरिए हम अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा समुदाय से अपील करना चाहते हैं कि वे ऐसी स्थितियों पर डाटा एकत्र करें। इस क्षेत्र में ज्यादा शोध की जरूरत है ताकि मरीजों को समय से बचाया जा सके।

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